Friday, 19 September 2025

भारत, ट्रंप और अमेरिका

 इतिहास के विद्यार्थी न होते हुए भी, मुझे उसमें गहरी रुचि है। किसी भी घटना को केवल जानना और समझना ही नहीं, बल्कि उसे विभिन्न दृष्टिकोणों से देख कर अंतिम निर्णय पर पहुँचना ही समझदारी है। जैसे अंक "6" एक ओर से "9" दिखाई देता है, साइड से "1" अथवा "–", दूर हटने पर बिन्दु "(·)" और उससे भी अधिक दूर देखने पर मानो अदृश्य; वहीं सूक्ष्मदर्शी (microscopic) दृष्टि से वह कुछ और ही प्रतीत होता है।

इसी प्रकार घटनाओं का व्यापक विश्लेषण (analysis) कर उसे समझा जा सकता है। दूसरों के अनुभवों से भी सीखा जा सकता है। शुतुरमुर्ग की भाँति सिर छिपा लेने से वास्तविकता नहीं बदलती।मान लेने से कि "खतरा दूसरों पर है, मुझ पर नहीं"— दूरदर्शिता नहीं।

चूंकि FB विस्तार में लिखने लायक नहीं है, इसीलिए फिर से ब्लॉग लिखना शुरू कर रहा हूँ।

आज अपने प्रिय ट्रंप और उनके प्रशासन के वक्तव्यों तथा कदमों से अनेक लोग आहत हैं। किन्तु क्या कल अमेरिका का आचरण भिन्न था? क्या यह उसकी पुरातन, विखंडनकारी (divide-and-rule) नीति यही नहीं थी?

चीन का उदाहरण देखिए। पहले उसे रूस के विरुद्ध खड़ा करने के लिए धन और तकनीक सौंपी गई; जब वह शक्तिशाली होने लगा, तो उसी के विरुद्ध मोर्चा खोला गया। अफगानिस्तान और ईरान के शासक भी उसके समीप गए, परन्तु आज वहाँ विनाश व्याप्त है। रूस जैसे महान राष्ट्र को भी बीते शताब्दियों से यूरोप के साथ मिलकर अथवा उसका सहारा लेकर अमेरिका लगातार दबाव में रखने का प्रयास करता रहा है।

युगोस्लाविया तटस्थ (neutral) हो चला था, फिर भी उस पर आक्रमण किया गया। मिस्र गुट-निरपेक्ष था, पर वहाँ भी सत्ता-पलट का समर्थन किया गया। भारत को भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उसने बार-बार परेशान किया है।

वास्तव में अमेरिका का कोई स्थायी मित्र नहीं। वह किसी को मित्र मानता ही नहीं। यदि यह बात स्पष्ट न हो तो कनाडा और यूरोप के देशों को देख लीजिए। केवल ट्रंप ही नहीं, पूर्ववर्ती शासक भी उन्हें बराबरी का नहीं, बल्कि मानो दास अथवा सेवक (vassal) के रूप में व्यवहार करते रहे हैं।

भविष्य में 1947 से अमेरिका और भारत के रिश्तों पर लिखूंगा, आप खुद ही पाएंगे, कुछ भी नया ट्रंप नहीं कर रहा। फिलहाल एक नजर देखते हैं ... उस व्यक्ति को जिसपर भारत भरोसा कर बैठा था।

📌 ट्रंप – भारत पर दबाव की टाइमलाइन (2017–2021 और 2025)                         

🔹 पहला कार्यकाल (2017–2021)

2017     

पहला कार्यकाल (2017–2021)

अप्रैल 2017 – डोनाल्ड ट्रंप (US President) ने भारत को “Tariff King” कहा, आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी कंपनियों पर ऊँचे टैरिफ लगाता है।

👉असर: शुरुआती व्यापार वार्ता में तनाव।

जून 2017 – ट्रंप प्रशासन ने यूरोप (EU) पर दबाव डाला कि भारत के साथ FTA तभी हो जब भारत अमेरिकी शर्तें भी माने।

👉असर: EU–India वार्ता धीमी पड़ी।

2018

जनवरी 2018 – ट्रंप ने (Davos Forum में) कहा – “India imposes massive tariffs, unfair to US farmers and companies.”

👉असर: अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को चुनौती।

जुलाई 2018 – US Trade Representative (Robert Lighthizer) ने भारत पर स्टील और एल्युमिनियम निर्यात को लेकर टैरिफ लगाए।

👉असर: भारतीय उद्योग को झटका।

2018 के अंत – EU नेताओं को संकेत दिया कि अगर EU भारत से FTA करता है, तो अमेरिकी व्यापारिक हित प्रभावित होंगे।

👉असर: यूरोप ने वार्ता टाली।

मार्च 2019 – ट्रंप प्रशासन ने भारत को GSP (Generalized System of Preferences) से बाहर कर दिया। 

👉असर: भारत को अरबों डॉलर का नुकसान।

जून 2019 – ट्रंप ने कहा – “India is the world’s highest tariffs country.”

👉असर: मीडिया में विवाद, भारत ने इंकार किया।

सितंबर 2019 – Houston ‘Howdy Modi’ इवेंट में ट्रंप ने मंच पर मोदी की तारीफ की, लेकिन बाद में व्यापार पर फिर हमला किया।

👉असर: रिश्तों में मिश्रित संदेश।

2020                         

फरवरी 2020 – ट्रंप भारत दौरा (Motera Stadium) किया, दोस्ती का संदेश दिया, लेकिन बंद कमरे में कहा कि “India must lower tariffs on Harley Davidson and agriculture.”                         

👉 असर: दोस्ती और दबाव दोनों साथ।

जून 2020 – पीटर नवारो (Trade Adviser)  ने आरोप लगाया – “India benefiting from cheap oil, not helping global balance.”                         

👉 असर: संकेत कि रूस–भारत नजदीकी अमेरिका को खटक रही थी।   

2020 के अंत – EU पर दबाव: अमेरिकी लॉबिंग कि EU भारत को रूस से दूर करे, तभी व्यापार सौदे आगे बढ़ें। 

👉 असर: EU से अभी तक FTA पर बात ही चल रही।

2021                         

जनवरी 2021 – ट्रंप कार्यकाल अंत: भारत–US व्यापार सौदा अधूरा रहा।

👉 असर: तनाव के साथ कार्यकाल खत्म।  

🔹 दूसरा कार्यकाल (2025–वर्तमान)              

मार्च 7, 2025 – Howard Lutnick (US Commerce Secretary) ने भारत के “उच्च टैरिफ” की आलोचना की, कहा – भारत को कृषि-बाज़ार खोलना होगा।                         

👉 असर: FTA वार्ता पर दबाव बढ़ा।       

अगस्त 18, 2025 – Peter Navarro (Trade Adviser) ने भारत से कहा – “Russia का तेल खरीदना बंद करो।”                 

👉 असर: अगले हफ्ते भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया (कुल 50%)।  

अगस्त 19, 2025 – Scott Bessent (Treasury Secretary) ने कहा – “cheap Russian oil से अमीर भारतीय परिवार मुनाफा कमा रहे हैं।”                         

👉 असर: अंतरराष्ट्रीय मीडिया विवाद, भारत ने आरोप खारिज किया। 

अगस्त 27, 2025 – Donald Trump (President) ने भारत को दोबारा “Tariff King” कहा और 50% टैरिफ की पुष्टि की।                         

👉 असर: भारतीय वस्त्र व निर्यात उद्योग को बड़ा झटका।  

अगस्त 28, 2025 – Scott Bessent ने कहा – “मोदी और ट्रंप अंततः साथ आएंगे।”                         

👉 असर: संकेत कि टकराव लंबा नहीं होगा।       

सितंबर 5, 2025 – Howard Lutnick का बयान – “भारत दो महीने में झुकेगा और टेबल पर लौटेगा।”  

👉 असर: भारत ने सार्वजनिक रूप से इंकार किया।  

सितंबर 11, 2025 – Howard Lutnick (CNBC Interview) ने कहा – “US भारत से डील करेगा, लेकिन शर्त है कि तेल खरीदना बंद करो।”                         

👉 असर: रूस–भारत संबंध पर सीधा दबाव।    

सितंबर 13, 2025 – Howard Lutnick ने कहा – “1.4 अरब लोग हैं लेकिन US corn का एक bushel भी नहीं खरीदा।”                         

👉 असर: अमेरिकी किसानों का दबाव भारत पर डाला।

सितंबर 18, 2025 – US Embassy India ने कुछ भारतीय व्यापारियों के वीज़ा रद्द किया (फेंटेनाइल रसायन तस्करी आरोपों में)।                         

👉 असर: कूटनीतिक तनाव।  

सितंबर 19, 2025 – EU Statement:                         

कहा – “India must reconsider Russia ties or forget EU–India Free Trade Deal.”                         

👉 असर: यूरोप ने भी अमेरिका की लाइन पकड़ी।  

सितंबर 19, 2025 – Pakistan–Saudi Mutual Defense Pact को ट्रंप सरकार ने इसका समर्थन किया, अप्रत्यक्ष दबाव भारत पर।        

👉 असर: भारत की सुरक्षा गणना पर असर।

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 ✅ Update (24 Sep, 2024)

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सितंबर 20, 2025 – Donald Trump (Fox News Interview में) भारत और रूस को “dead economies” कहा, साथ ही टैरिफ विवादों में भारत को “ट्रेड बाधक” बताया।

👉 असर: भारतीय उद्योग जगत और मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया, द्विपक्षीय वार्ता और कठिन हुई।


सितंबर 23, 2025 – Donald Trump (UNGA Speech) में भारत और चीन को “Russia की जंग का प्रमुख फंडर” कहा, चेतावनी – अगर तेल खरीदना बंद न किया तो “बहुत ही कठोर नए टैरिफ” लगाए जाएँगे।

👉 असर: अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को सीधा निशाना, निवेशकों में अनिश्चितता।


सितंबर 23, 2025 – US Trade Department (Press Briefing): भारत पर “अनुचित सब्सिडी और प्रतिबंधात्मक बाजार नीति” का आरोप, कहा – भारत WTO नियम तोड़ रहा है।

👉 असर: नई जांच प्रक्रिया शुरू, निर्यातकों में चिंता।


सितंबर 24, 2025 – Donald Trump (New York Rally):

सोशल मीडिया पर पोस्ट – “Looks like we’ve lost India to China and Russia”।

👉 असर: भारत को खुलेआम “प्रतिद्वंद्वी खेमे” में रखने का संकेत।


सितंबर 25, 2025 – Scott Bessent (Treasury Secretary) ने कहा – “Indian billionaires are profiteering from cheap Russian crude while American families pay more.”

👉 असर: अमेरिकी जनता के गुस्से को भारत के खिलाफ मोड़ा गया।


सितंबर 27, 2025 – US State Department (Statement)

भारतीय कंपनियों पर चेतावनी – “Russia के साथ ऊर्जा सौदे जारी रहे तो सेकेंडरी सैंक्शन लागू होंगे।”

👉 असर: भारत–रूस ऊर्जा परियोजनाओं पर बड़ा खतरा।

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सितंबर 29, 2025 – US Administration द्वारा चाबहार पोर्ट ऑपरेटर्स (ईरान–भारत परियोजना) पर प्रतिबंध लागू।

👉 असर: भारत–ईरान सामरिक सहयोग को गहरी चोट। 

         

📌 दोनों कार्यकाल मिलाकर देखें तो ट्रंप और उनकी टीम ने वही पुरानी अमेरिकी आदत दिखाई: लगातार टैरिफ, रूस तेल, EU दबाव, कृषि-बाज़ार और सुरक्षा गठबंधन के मुद्दों पर भारत को घेरना।

अब यह आप पर निर्भर है—क्या आप आहत होकर भरोसा बनाए रखेंगे, या दृढ़ता से आगे बढ़कर आत्मनिर्भर बनेंगे? यह भरोसा, जो आपने किया, क्या वास्तव में भरोसेमंद था?

मैं संबंध तोड़ने की बात नहीं कर रहा; बल्कि अपनी आँखें खोलकर समझदारी से आगे बढ़ने की बात कर रहा हूँ। सत्य से भागने या उसे किसी और नजरिए से देखने से वह नहीं बदलता।

दुनिया में अधिकांश लोग स्वार्थ से प्रेरित हैं। ऐसे में समझदार व्यक्ति अपने हित और कार्य को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक संबंध बनाए रखते हैं, अत्यधिक भरोसे या नफ़रत से बचते हैं, और आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष भी करते हैं। युद्ध के बाद भी बातचीत जारी रखते हैं

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