इतिहास के विद्यार्थी न होते हुए भी, मुझे उसमें गहरी रुचि है। किसी भी घटना को केवल जानना और समझना ही नहीं, बल्कि उसे विभिन्न दृष्टिकोणों से देख कर अंतिम निर्णय पर पहुँचना ही समझदारी है। जैसे अंक "6" एक ओर से "9" दिखाई देता है, साइड से "1" अथवा "–", दूर हटने पर बिन्दु "(·)" और उससे भी अधिक दूर देखने पर मानो अदृश्य; वहीं सूक्ष्मदर्शी (microscopic) दृष्टि से वह कुछ और ही प्रतीत होता है।
इसी प्रकार घटनाओं का व्यापक विश्लेषण (analysis) कर उसे समझा जा सकता है। दूसरों के अनुभवों से भी सीखा जा सकता है। शुतुरमुर्ग की भाँति सिर छिपा लेने से वास्तविकता नहीं बदलती।मान लेने से कि "खतरा दूसरों पर है, मुझ पर नहीं"— दूरदर्शिता नहीं।
