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Thursday, 20 November 2025

RT इंडिया: भारत में भरोसा जीतें

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भारत में आज भी स्वस्थ और ईमानदार विदेशी मीडिया की गंभीर कमी है। यदि RT इस खाली जगह को भरकर लोकप्रिय बनना चाहती है, तो इसे सिर्फ़ दर्शकों को जानकारी देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए—बल्कि इसके लिए एक व्यावहारिक रणनीति बनानी होगी और राजनीतिक उलझनों से पूरी तरह बचना होगा।

साथ ही, RT को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी सामग्री (content) न केवल अंग्रेज़ी और हिंदी में उपलब्ध हो, बल्कि कुछ प्रमुख स्थानीय भाषाओं में भी सहज रूप से पहुँच सके, ताकि हर भारतीय दर्शक इसे आसानी से देख और समझ सके।

Wednesday, 29 October 2025

🌏 वैश्विक शक्ति-संतुलन का नया दौर


1991 के बाद अमेरिका एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा और यूरोप के कई पूर्व उपनिवेशवादी देश उस वैश्विक व्यवस्था के अनुकूल हो गए। सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो (NATO) का विस्तार तेज़ हुआ — 1999 में पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य जैसे देशों का प्रवेश और आगे 2004, 2009, 2017, 2024 तक सदस्यता-वृद्धि होती रही। इस विस्तार ने पश्चिमी रक्षा ढांचे को रूस की सीमाओं तक पहुँचा दिया।

यूरोप और रूस के बीच सहयोग के वर्षों में वैश्विक स्थिरता बनी रही, लेकिन इस स्थिरता से पश्चिमी हथियार उद्योगों के मुनाफे में गिरावट आई। “लोकतंत्र बनाम साम्यवाद (Communism)” जैसे वैचारिक संघर्ष के पुराने नारों की चमक फीकी पड़ चुकी थी। इस बीच आतंकवाद और इस्लामी चरमपंथ जैसे नए “वैश्विक खतरे” प्रस्तुत किए गए, जिनके बहाने सैन्य अभियानों और रक्षा खर्चों को वैध ठहराया गया — पर धीरे-धीरे इन अभियानों के वास्तविक लाभ और मंशा पर सवाल उठने लगे।

Monday, 22 September 2025

भारत–अमेरिका रिश्ते: छद्म सहयोग या स्थायी अभिशाप?

भारत–अमेरिका रिश्तों का क्रमिक इतिहास (1947–2025)

USA — भारत का दोस्त, चालाक साझेदार या अवसरवादी प्रतिद्वंद्वी?


1947–2025 की घटनाओं की रोशनी में इस सवाल के कई जवाब मिलते हैं।
 आप खुद भी सोचिए — पहले कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सामने रख रहा हूं, फिर अपने विचार!

Saturday, 20 September 2025

प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री – आज के भारत की आत्मनिर्भरता और सुरक्षा नीति का आधार शिला रखने वाले व्यक्ति

प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री 

"मैं नहीं झुकेगा" का वास्तविक उदाहरण भारत के प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का काल (1964– 1966 – लगभग 19 महीने) छोटा अवश्य था, परंतु उन्होंने भारत को आत्मसम्मान, स्वावलम्बन और साहस का मार्ग दिखाया। अमेरिका के दबाव, भोजन की कमी और युद्ध जैसी त्रासदियों के बीच भी वे अडिग रहे। 

1. प्रधानमंत्री पद (1964)

  • 27 मई 1964 को पं. जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ।
  • कांग्रेस में इंदिरा गांधी और मोरारजी देसाई जैसे नेताओं के बीच मतभेद थे।
  • संतुलित, सरल, और “समझौते के उम्मीदवार” के रूप में लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री चुने गए।
  • उनका व्यक्तित्व छोटा कद, सरल जीवन, परन्तु दृढ़ निश्चयी और ईमानदार छवि का था।

Friday, 19 September 2025

भारत, ट्रंप और अमेरिका

 इतिहास के विद्यार्थी न होते हुए भी, मुझे उसमें गहरी रुचि है। किसी भी घटना को केवल जानना और समझना ही नहीं, बल्कि उसे विभिन्न दृष्टिकोणों से देख कर अंतिम निर्णय पर पहुँचना ही समझदारी है। जैसे अंक "6" एक ओर से "9" दिखाई देता है, साइड से "1" अथवा "–", दूर हटने पर बिन्दु "(·)" और उससे भी अधिक दूर देखने पर मानो अदृश्य; वहीं सूक्ष्मदर्शी (microscopic) दृष्टि से वह कुछ और ही प्रतीत होता है।

इसी प्रकार घटनाओं का व्यापक विश्लेषण (analysis) कर उसे समझा जा सकता है। दूसरों के अनुभवों से भी सीखा जा सकता है। शुतुरमुर्ग की भाँति सिर छिपा लेने से वास्तविकता नहीं बदलती।मान लेने से कि "खतरा दूसरों पर है, मुझ पर नहीं"— दूरदर्शिता नहीं।